मोतिहारी में जहरीली शराब का कहर: 3 दिन में 7 मौतें, 14 गंभीर

पटना:- बिहार के पूर्वी चंपारण जिला मुख्यालय मोतिहारी में जहरीली शराब ने भीषण तबाही मचा दी है। महज 3 दिनों के भीतर 7 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 14 लोग अब भी गंभीर हालत में विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें से 6 लोगों की आंखों की रोशनी चली गई है, जो घटना की भयावहता को दर्शाता है।

मृतकों की पहचान चंदू कुमार, प्रमोद यादव, परीक्षण मांझी, हीरालाल भगत, लालकिशोर राय, संपत साह और लड्डू साह के रूप में हुई है। गुरुवार को 2, शुक्रवार को 3 और शनिवार सुबह 2 लोगों की मौत के साथ यह आंकड़ा 7 तक पहुंच गया।

जहरीली शराब पीकर गंभीर हालत में पड़े लोग

गंभीर रूप से बीमार पड़े लोगों में लोहा ठाकुर, राहुल कुमार, रविंद्र यादव (35), दिनेश यादव (28), उमेश राम समेत 14 लोग शामिल हैं। इनमें से तीन की हालत नाजुक बनी हुई है। सभी का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में जारी है।

घटना से क्षेत्र में दहशत

यह घटना रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के बालगंगा गांव और तुरकौलिया थाना क्षेत्र के परसोना गांव की है। घटना के बाद इलाके में दहशत और गुस्से का माहौल है। प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और अवैध शराब नेटवर्क पर कार्रवाई की बात कही जा रही है।

इस बीच, घटना को लेकर सियासत भी तेज हो गई है। जन सुराज ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा –

पत्थर दिल भी इस मंजर को देख पसीज जाए, लेकिन सरकार में बैठे लोगों को तो इस फर्जी शराबबंदी क़ानून से अपनी जेबें भरनी है, उन्हें इन मौतों से क्या लेना-देना?

राज्य की मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति

वहीं, राज्य की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियां भी इस मुद्दे को और संवेदनशील बना रही हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच संभावित राजनीतिक बदलाव और नेतृत्व परिवर्तन का असर राज्य की शराब नीति पर भी पड़ सकता है। ऐसे में यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या नई राजनीतिक परिस्थितियों में शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन में बदलाव होगा या इसे और सख्ती से लागू किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं, बल्कि यह भी दर्शाती हैं कि शराबबंदी के बावजूद अवैध कारोबार किस हद तक सक्रिय है। ऐसे में संभावित सत्ता परिवर्तन के साथ इस नीति की समीक्षा और प्रभावी क्रियान्वयन पर गंभीरता से विचार करना आवश्यक हो गया है।

ये भी पढ़ेः-

Related Posts

BBAU दीक्षांत समारोह में गोल्ड मेडलिस्टों की नाराजगी, 22 छात्रों को ही मंच से सम्मान..?

लखनऊ:- बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (BBAU) का 11वां दीक्षांत समारोह आज 29 अगस्त को आयोजित किया जा रहा है। समारोह में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप…

Subhash Chandra Insolvency: ₹22,006 करोड़ के दावे के सामने ₹6.5 करोड़, NCLT के फैसले पर सवाल

नई दिल्ली:- भारत की कॉरपोरेट डेट रिकवरी व्यवस्था में शायद ही कोई मामला इतना बड़ा अंतर दिखाता हो- ₹22,006 करोड़ के admitted claims के सामने महज ₹6.5 करोड़ का repayment…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *