CM कुर्सी पर सट्टा हाई: NDA की बंपर जीत के बाद भी बिहार में सियासी अनिश्चितता, करोड़ों के दांव

पटना:- बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चाएं अब सियासी गलियारों से निकलकर सट्टा बाजार तक पहुंच चुकी हैं। बताया जा रहा है कि राज्य में संभावित नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच करोड़ों रुपये के दांव लगाए जा रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, मुंबई, पुणे और दिल्ली में बैठे बड़े सट्टा कारोबारी बिहार के संभावित 10 चेहरों पर जमकर दांव खेल रहे हैं। इस हाई-प्रोफाइल दांव में स्थानीय स्तर पर भी नेटवर्क तैयार किया गया है, जिससे बिहार से सीधे सट्टा लगाया जा सके।

सट्टा बाजार के जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री पद की रेस में 10 प्रमुख नेताओं को शामिल किया गया है, जिनमें सबसे आगे सम्राट चौधरी का नाम चल रहा है। पिछले 15 दिनों से उनके नाम पर 60-68 का रेट बना हुआ था, हालांकि हाल के दिनों में यह घटकर 52-54 तक आ गया है, जो बदलते सियासी समीकरणों की ओर इशारा करता है।

सट्टा बाजार की भाषा में 60 के रेट का मतलब है कि यदि कोई सम्राट चौधरी के नाम पर 1 लाख रुपये लगाता है, तो जीतने पर उसे 1.6 लाख रुपये मिल सकते हैं। वहीं, यदि किसी अन्य नेता को मुख्यमंत्री बनाया जाता है, तो लगाया गया पूरा पैसा डूब जाएगा।

इस पूरे घटनाक्रम का एक बड़ा राजनीतिक पहलू भी सामने आ रहा है। एनडीए की पूर्ण बहुमत से हुई जीत के बावजूद मुख्यमंत्री पद को लेकर सट्टा बाजार का इस तरह गर्म होना सत्ता के भीतर व्याप्त अनिश्चितता और अंदरूनी खींचतान को उजागर करता है। यह स्थिति न केवल जनता के स्पष्ट जनादेश का अनादर प्रतीत होती है, बल्कि कहीं न कहीं जनता के साथ एक प्रकार का धोखा भी दर्शाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह परिदृश्य राजनीतिक प्रक्रिया की गंभीरता, पारदर्शिता और स्थिरता पर भी सवाल खड़े करता है। जनता ने जिस विश्वास और अपेक्षा के साथ अपना मत दिया है, उसके अनुरूप नेतृत्व में स्पष्टता, ईमानदारी और जवाबदेही का परिचय आवश्यक है।

फिलहाल, बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इस पर सस्पेंस बरकरार है, लेकिन इतना तय है कि सियासत के साथ-साथ सट्टा बाजार भी पूरी तरह गरमाया हुआ है।

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