Women’s Reservation से जुड़े तीन विधेयकों पर फिर होगी सदन में चर्चा

नई दिल्ली:- लोकसभा में आज Women’s Reservation को लागू करने की दिशा में अहम माने जा रहे तीन महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा फिर से शुरू होगी। इनमें संविधान (143 संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल हैं। इनका उद्देश्य संसद, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना है।

इन विधेयकों को नारी शक्ति वंदन अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने के लिए लाया गया है। इस अधिनियम के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए लगभग एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। हालांकि, मूल कानून में यह व्यवस्था अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन से जुड़ी हुई थी, जिससे इसके लागू होने में देरी की आशंका जताई जा रही थी।

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करते हुए सदन की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा। प्रस्ताव के अनुसार, 815 सदस्य राज्यों से और 35 सदस्य केंद्र शासित प्रदेशों से चुने जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे प्रतिनिधित्व अधिक संतुलित होगा और महिला आरक्षण को लागू करने में मदद मिलेगी।

वहीं, परिसीमन विधेयक, 2026 के तहत एक परिसीमन आयोग के गठन का प्रावधान किया गया है, जो संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण करेगा और अनुसूचित जाति, जनजाति तथा महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का निर्धारण करेगा। इससे महिला आरक्षण के प्रावधानों को जमीनी स्तर पर लागू करने की प्रक्रिया को स्पष्ट दिशा मिलने की उम्मीद है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करते हुए कहा कि इसके जरिए दिल्ली, जम्मू-कश्मीर सहित केंद्र शासित प्रदेशों में भी नई परिसीमन व्यवस्था लागू की जाएगी, जिससे वहां भी महिलाओं को समान प्रतिनिधित्व मिल सके।

प्रधानमंत्री का संदेश: ‘यह अधिकार है, उपकार नहीं’

चर्चा के दौरान PM  मोदी ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी केवल संख्या बढ़ाने का विषय नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं को प्रतिनिधित्व देना कोई उपकार नहीं, बल्कि उनका अधिकार है। प्रधानमंत्री ने विपक्ष से अपील की कि इस मुद्दे को राजनीतिक नजरिये से न देखा जाए और इसे देशहित में समर्थन दिया जाए।

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने उठाया सवालः-

हालांकि, विपक्ष ने इन विधेयकों को लेकर सवाल भी उठाए हैं। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि सरकार मौजूदा लोकसभा संरचना के साथ ही महिला आरक्षण लागू कर सकती है, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़कर अनावश्यक देरी की जा रही है। उन्होंने जाति जनगणना और OBC अधिकारों को लेकर भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।

उधर, गृह मंत्री अमित शाह ने दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व को लेकर उठ रही आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था में किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं होंगी, बल्कि सभी क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा।

इन विधेयकों पर जारी बहस को भारतीय राजनीति में एक बड़े बदलाव की दिशा में कदम माना जा रहा है। अगर ये पारित होते हैं, तो देश की संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी में ऐतिहासिक वृद्धि देखने को मिल सकती है।

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