पटना:- बिहार की राजनीति इस समय बहुस्तरीय गतिविधियों से गुजर रही है, जहां सत्ता पक्ष, विपक्ष और संगठनात्मक स्तर पर एक साथ कई बड़े घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। CM Face को लेकर NDA में मंथन जारी है, वहीं कांग्रेस जमीनी मुद्दों को उठाकर राजनीतिक स्पेस बनाने की कोशिश में है। इस बीच विपक्ष के तीखे बयान और दल-बदल की घटनाएं सियासी समीकरणों को और जटिल बना रही हैं।
NDA में CM Face को लेकर मंथनः-
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन(NDA) ने बिहार मुख्यमंत्री चयन के लिए मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। वर्तमान कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान 14 अप्रैल को विधायक दल की बैठक में CM चेहरे पर अंतिम निर्णय लेंगे। इसी बीच 15 अप्रैल को नए मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के शपथ ग्रहण की तैयारी जोरो पर है।
पूर्ण बहुमत के बावजूद नेतृत्व चयन में देरी, अंदरूनी समीकरणों की ओर संकेत दे रही है। इसी बीच बिहार विधान सभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दिया है।
CM Face को लेकर तेजस्वी यादव का राजनीतिक हमलाः-
नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav ने बिहार में नेतृत्व परिवर्तन पर कहा – बिहार का मुख्यमंत्री कोई भी बने, कंट्रोल गुजरात से ही होगा।
कांग्रेस का “प्रेस से मिलिए” अभियानः-
प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के नेतृत्व में नई रणनीति की शुरुआत की गई है। बिहार कांग्रेस हर सप्ताह प्रदेश के 38 जिलों से जुड़े जमीनी मुद्दों को उठाने की योजना। बनाई है और इस योजना को नाम दिया है – प्रेस से मिलिए। इस अभियान का उद्देश्य कानून-व्यवस्था (लूट, अपराध), महिला सुरक्षा (बलात्कार), शिक्षा और स्वास्थ्य, किसान और मजदूर समस्याएं, घोटाले और प्रशासनिक विफलता जैसे मुद्दों को प्रेस के माध्यम से जनता के बीच लाना है। इसके लिए सदाकत आश्रम में नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए मुद्दों को सार्वजनिक किया जाएगा। जिससे संगठन का जमीनी स्तर पर सक्रियता और मजबूती दोनों बनी रहेगी।
दल-बदल से बदलते समीकरणः-
कांग्रेस को मजबूती – जन सुराज के गोविंद आनंद, अमित आनंद, अभिराज सिंह, प्रशांत अभिषेक, शायक आलम, प्रो. चंद्रिमा सिंह जैसे प्रमुख नाम कांग्रेस में शामिल हुए। तो वहीं कांग्रेस को झटका – देते हुए वरिष्ठ नेता और पूर्व विधान पार्षद डॉ. अजय कुमार सिंह JDu में शामिल हुए।
निष्कर्ष:
बिहार इस समय एक संक्रमणकालीन राजनीतिक दौर से गुजर रहा है, जहां सत्ता गठन, विपक्ष की रणनीति और नेताओं के बदलते रुख मिलकर एक जटिल लेकिन दिलचस्प सियासी तस्वीर पेश कर रहे हैं। आने वाले कुछ दिन राज्य की राजनीति की दिशा तय करने में अहम साबित होंगे।
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