वॉशिंग्टन:- अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर NATO को लेकर तीखा बयान दिया है। एक हालिया इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा कि वे NATO से बाहर निकलने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। उन्होंने NATO को ‘कागजी शेर’ बताते हुए इसकी प्रभावशीलता पर सवाल उठाया है।
ट्रम्प ने कहा कि वे पहले से ही NATO की भूमिका से ज्यादा प्रभावित नहीं थे और उनका मानना है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन भी इसी तरह सोचते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका हमेशा अपने सहयोगी देशों के साथ खड़ा रहा है, लेकिन जब अमेरिका को समर्थन की जरूरत पड़ी, तब कोई भी देश उसके साथ नहीं आया। ट्रंप ने यूक्रेन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां अमेरिका ने खुलकर मदद की थी, लेकिन बदले में अमेरिका को वैसा समर्थन नहीं मिला।
इस बयान का संदर्भ Russia-Ukraine War से भी जुड़ा हुआ है। इस युद्ध में NATO के कई देशों और अमेरिका ने यूक्रेन को सैन्य और आर्थिक मदद दी है, जबकि रूस इसके खिलाफ लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है। युद्ध के समय यूक्रेन की मदद कर रहे NATO पर व्लादिमीर पुतिन का भी इसी तरह का बयान रहा है। Trump के बयान से यह संकेत मिलता है कि वे NATO की इस भूमिका और उसके प्रभाव को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब नाटो देशों ने ईरान से जुड़े तनाव के बीच अमेरिका का साथ देने से इनकार कर दिया। अमेरिका चाहता था कि होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को खुला रखने के लिए NATO देश अपने युद्धपोत भेजें, लेकिन सहयोगी देशों ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया।
NATO आखिर कितने देश है मेंः-
7 मार्च 2024 तक, नाटो के 32 सदस्य देश रहे हैं, जिन्हें अक्सर सहयोगी कहा जाता रहा है, जिनमें 1949 के 12 संस्थापक सदस्य और बाद में शामिल हुए 20 सदस्य शामिल हैं। इस गठबंधन में यूरोप और उत्तरी अमेरिका के देश शामिल हैं, जिनमें स्वीडन सबसे नया सदस्य है। सभी सदस्य पारस्परिक रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।
NATO के सभी सदस्य देश इस प्रकार हैं:
United States, Canada, United Kingdom, France, Germany, Italy, Spain, Portugal, Belgium, Netherlands, Luxembourg, Denmark, Norway, Iceland, Poland, Czech Republic, Hungary, Slovakia, Slovenia, Croatia, Montenegro, North Macedonia, Albania, Greece, Turkey, Romania, Bulgaria, Estonia, Latvia, Lithuania, Finland और Sweden
ट्रम्प के इस बयान ने एक बार फिर NATO की एकजुटता और अमेरिका की विदेश नीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
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