Form-6 Controversy: बंगाल में चुनावी माहौल गरम, BJP-TMC के बीच टकराव

पश्चिम बंगालः- पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले सियासी माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। इसी बीच Form-6 को लेकर मंगलवार को बड़ा विवाद सामने आया, जिसने राजनीति को और तेज कर दिया। दरअसल, राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) कार्यालय के बाहर BJP और तृणमूल कांग्रेस (TMC )के समर्थक आमने-सामने आ गए। पहले हल्की बहस हुई, लेकिन कुछ ही देर में मामला धक्का-मुक्की और हाथापाई तक पहुंच गया। इतना ही नहीं, कुछ लोगों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ने की भी कोशिश की, जिससे पूरे इलाके में तनाव फैल गया।

हालांकि, इस पूरे विवाद की शुरुआत एक दिन पहले ही हो चुकी थी। सोमवार को तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी सीईओ (CEO) कार्यालय पहुंचे थे और मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल को ज्ञापन सौंपा था। उस दौरान भी पार्टी ने फॉर्म-6 को लेकर अपनी आपत्ति जाहिर की थी।

इसके बाद, मंगलवार को मामला और बढ़ गया। BJP के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य और विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी भी अपने समर्थकों के साथ CEO कार्यालय पहुंचे। इसी दौरान बड़ी संख्या में फॉर्म-6 जमा किए जाने पर तृणमूल ने आरोप लगाया कि बाहरी राज्यों—जैसे बिहार और उत्तर प्रदेश—के लोगों को बंगाल का मतदाता बनाने की कोशिश हो रही है।

बंगाल में चुनावी माहौल गरम, BJP-TMC के बीच टकरावः-

वहीं, इन आरोपों के बाद तृणमूल समर्थकों ने CEO कार्यालय के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया। दूसरी तरफ भाजपा समर्थक भी मौके पर मौजूद थे। नतीजतन, दोनों पक्षों के बीच पहले कहासुनी हुई और फिर माहौल बिगड़ता चला गया। दोपहर से लेकर शाम तक यह इलाका पूरी तरह तनावपूर्ण बना रहा, जबकि पुलिस को हालात संभालने के लिए लगातार कोशिश करनी पड़ी।

हालांकि, शाम होते-होते मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने साफ कहा कि फॉर्म-6 केवल उन लोगों के लिए है, जो पहली बार मतदाता के रूप में पंजीकरण कराना चाहते हैं। इसलिए, इसमें किसी तरह की गड़बड़ी की आशंका नहीं है।

इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि यदि किसी नाम को जोड़ने या हटाने को लेकर विवाद होता है, तो उसका अंतिम फैसला ट्राइब्यूनल करता है। यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत चलती है, इसलिए इसमें किसी भी तरह का हस्तक्षेप करना कानूनन गलत होगा। उन्होंने यह तक कहा कि अगर किसी भी तरह की गड़बड़ी साबित होती है, तो वे अपने पद से इस्तीफा देने के लिए भी तैयार हैं।

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार चुनाव आयोग पर ट्राइब्यूनल गठन में देरी का आरोप लगा रही हैं। हालांकि, इस पर CEO ने जवाब देते हुए कहा कि जैसे ही राज्य सरकार जरूरी ढांचा उपलब्ध कराएगी, ट्राइब्यूनल का काम तुरंत शुरू कर दिया जाएगा। फिलहाल, सभी प्रक्रियाएं नियमों के तहत आगे बढ़ रही हैं।

कुल मिलाकर, अगर देखा जाए तो फॉर्म-6 का यह मुद्दा अब सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रह गया है, बल्कि चुनाव से पहले एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन चुका है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है, जिसका सीधा असर राज्य की राजनीति पर देखने को मिल सकता है।

Prabhanshu Pandey

मेरा नाम प्रभांशु पाण्डेय है। मैं एक कॉपीराइटर हूं और वर्तमान में दूरदर्शन न्यूज में ट्रेनी के रूप में कार्यरत हूं। मैंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से विज्ञापन एवं जनसंपर्क में पीजी डिप्लोमा किया है। साथ ही, मेरा स्नातक गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार और पत्रकारिता में हुआ है। इस प्लेटफॉर्म पर लेखन के माध्यम से मेरा उद्देश्य सरल भाषा और प्रभावी संचार के जरिए लोगों से हर मुद्दे पर जुड़ना है, ताकि उन्हें समाचार के साथ नई और उपयोगी जानकारी भी मिल सके।

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