संस्कृत विकास पर शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी और कुलपति मुरलीमनोहर पाठक की अहम बैठक

नई दिल्लीः- दिल्ली में संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन एवं उसके वैश्विक पुनरुत्थान की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं सार्थक शिष्टाचार भेंट का आयोजन सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर बिहार के शिक्षा मंत्री मिथलेश तिवारी ने श्री लाल बहादुर राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति प्रोफेसर मुरलीमनोहर पाठक से शिष्टाचार भेंट की। इस गरिमामयी अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रोफेसर पवन कुमार शर्मा की भी विशेष एवं उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिससे यह बैठक और अधिक औपचारिक, सुसंगठित एवं उद्देश्यपूर्ण बन गई।

यह उच्चस्तरीय भेंट संस्कृत भाषा के सर्वांगीण विकास, उसकी वर्तमान शैक्षणिक स्थिति तथा भविष्य की संभावनाओं पर केंद्रित एक गहन एवं सार्थक विमर्श का अवसर सिद्ध हुई। दोनों पक्षों के मध्य इस तथ्य पर व्यापक सहमति व्यक्त की गई कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं, अपितु भारतीय सभ्यता, संस्कृति, दर्शन एवं समृद्ध ज्ञान परंपरा की आधारशिला है। अतः इसके अध्ययन, अध्यापन एवं शोध कार्यों को आधुनिक शिक्षा व्यवस्था के साथ अधिक प्रभावी एवं समन्वित रूप में आगे बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।

इस बैठक के दौरान बिहार राज्य में संस्कृत शिक्षा के विस्तार पर भी विस्तृत चर्चा हुई। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने अवगत कराया कि राज्य सरकार संस्कृत विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के सुदृढ़ीकरण, योग्य शिक्षकों की नियुक्ति तथा विद्यार्थियों में संस्कृत के प्रति रुचि जागृत करने हेतु सतत प्रयासरत है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि संस्कृत भाषा को आधुनिक तकनीक, डिजिटल शिक्षण पद्धति एवं रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों से जोड़ा जाए, तो यह नई पीढ़ी के लिए अधिक उपयोगी एवं आकर्षक सिद्ध हो सकती है।

कुलपति प्रोफेसर मुरलीमनोहर पाठक ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, शोध परियोजनाओं तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित संस्कृत संवर्धन कार्यक्रमों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित न रहकर संस्कृत को समकालीन संदर्भों में भी प्रासंगिक बनाना है।

डिजिटल संसाधनों पर दिया जा रहा बलः-

इसके लिए डिजिटल संसाधनों, ऑनलाइन पाठ्यक्रमों तथा वैश्विक शैक्षणिक सहयोग को निरंतर विस्तार दिया जा रहा है। कुलसचिव प्रोफेसर पवन कुमार शर्मा ने विश्वविद्यालय की प्रशासनिक एवं शैक्षणिक व्यवस्थाओं की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए संस्थान की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनाने के प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने हेतु निरंतर नवाचार एवं सुधारात्मक कदम अपनाए जा रहे हैं।

इस अवसर पर संस्कृत भाषा के संरक्षण के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने की संभावनाओं पर भी गंभीर विचार-विमर्श हुआ। इस मत पर सहमति व्यक्त की कि संस्कृत केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि यह भविष्य की एक सशक्त बौद्धिक, सांस्कृतिक एवं दार्शनिक संपदा है।अंततः यह भेंट अत्यंत सफल, सार्थक एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुई, जिसने संस्कृत भाषा के विकास के लिए एक नई दिशा एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया।इस पूरे कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सहायक अभियंता अजनी राय की भी उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

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