रांची:- झारखंड की राजधानी में बीते 25 जुलाई से चल रहे छात्र आंदोलन की जीत हुई। सरकार द्वारा विवादित परीक्षाओं को रद करने की घोषणा के बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने 2 अगस्त से चल रहा अपना आमरण अनशन स्थगित किया, लेकिन पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की लड़ाई जारी रखने का संकल्प दोहराया। वहीं झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL) और टीडीपीएल (TDPL) की सभी विवादित परीक्षाओं को रद करने की घोषणा के बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपना 16 दिवसीय अनशन समाप्त कर दिया है। सोमवार देर रात उन्होंने एलान किया कि 2 अगस्त से चल रहा उनका आमरण अनशन अब स्थगित किया जा रहा है।
20 जुलाई की बैठक और CID जांच
महतो ने बताया कि 20 जुलाई को मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक के बाद 28 जुलाई से मामले की सीआईडी जांच शुरू हो चुकी है। उनके अनुसार जांच पूरी सख्ती के साथ चल रही है, और इसके दायरे में पूर्व मुख्य सचिव तथा जेपीएससी अध्यक्ष जैसे उच्च पदस्थ अधिकारी भी शामिल किए गए हैं।
सरकार के फैसले की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह कोई आसान निर्णय नहीं था, क्योंकि जेएसएससी-सीजीएल की भर्ती प्रक्रिया लगभग नियुक्ति के चरण तक पहुंच चुकी थी और कई अभ्यर्थी अपनी सीट लगभग पक्की मान चुके थे। बावजूद इसके, छात्रों के हित और मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया।
हर वर्ग का जताया आभार
आंदोलन के दौरान साथ देने वाले हर वर्ग के प्रति देवेंद्र महतो ने आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से झारखंड सरकार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, मंत्री दीपिका पांडेय, विधायक इरफान अंसारी, साथी छात्रों, मीडिया और सामाजिक कार्यकर्ताओं का धन्यवाद किया। साथ ही उन्होंने उन अनजान लोगों को भी याद किया जो देर रात आंदोलनकारियों के लिए पानी और नाश्ते की व्यवस्था करते रहे।
आगे भी जारी रहेगी लड़ाई
अनशन स्थगित करते हुए महतो ने स्पष्ट किया कि व्यवस्था में सुधार के लिए उनका संघर्ष थमेगा नहीं। उन्होंने कहा कि उनकी कल्पना एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था की है जहां पेपर लीक और धांधली की कोई गुंजाइश न हो, ताकि आज जो बच्चे प्राइमरी या सेकेंडरी स्कूल में पढ़ रहे हैं, उन्हें भविष्य में जेपीएससी या जेएसएससी की परीक्षा देते समय ऐसा बलिदान न देना पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि इस लक्ष्य के लिए यदि विधानसभा में नए कानून बनाने पड़ें या संविधान में संशोधन की जरूरत पड़े, तो वह भी किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग रखी कि भविष्य में होने वाली हर परीक्षा की कड़ी निगरानी और ऑडिट हो, और हर चरण पर पारदर्शिता का स्पष्ट प्रमाण दिया जाए।
नवनियुक्त अभ्यर्थियों में असंतोष, हाईकोर्ट जाने की तैयारी
दूसरी ओर, JSSC-CGL सहित सभी TDPL परीक्षाओं के रद होने से सैकड़ों नवनियुक्त अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। प्रभावित अभ्यर्थियों का कहना है कि यह फैसला अन्यायपूर्ण है, क्योंकि उनकी नियुक्तियां पहले हाईकोर्ट के आदेश पर हुई थीं। वे अब इस फैसले के खिलाफ न्याय की गुहार लेकर हाईकोर्ट का रुख करने की तैयारी में हैं।
इस बीच, हेमंत सरकार ने छात्रों की प्रमुख मांगें मानते हुए विवादित परीक्षाओं को रद तो कर दिया है, लेकिन सीबीआई जांच की मांग को फिलहाल खारिज कर दिया है यानी मामले की जांच अभी राज्य की सीआईडी के हवाले ही रहेगी।


