UP में 25,000 करोड़ के AI समझौते पर सियासी हमले तेज

लखनऊ:-  उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षेत्र में 25,000 करोड़ रुपये के बड़े निवेश समझौते के ऐलान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। सरकार ने Puch AI के साथ हुए इस MoU को राज्य के तकनीकी विकास की दिशा में बड़ा कदम बताया है, जबकि विपक्ष ने इसकी पारदर्शिता और प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं।

सरकार के अनुसार, इस समझौते के तहत प्रदेश में AI पार्क, अत्याधुनिक डेटा सेंटर और एक AI विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी। इन परियोजनाओं के जरिए उत्तर प्रदेश को एक उभरते टेक्नोलॉजी हब के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने X पर कहा कि यह पहल शासन व्यवस्था को सशक्त करेगी, नवाचार को बढ़ावा देगी और युवाओं के लिए भविष्य के नए अवसर खोलेगी।

Puch AI एक बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप है, जिसकी स्थापना 2025 में सिद्धार्थ भाटिया और अर्जित जैन ने की थी। कंपनी का उद्देश्य AI तकनीक को आम लोगों तक सरल तरीके से पहुंचाना है। यह प्लेटफॉर्म WhatsApp और वॉयस कॉल के माध्यम से चैट सहायता, इमेज व वीडियो जनरेशन और फैक्ट-चेकिंग जैसी सेवाएं प्रदान करता है। साथ ही, यह क्षेत्रीय भाषाओं पर विशेष फोकस रखता है, जिससे कम तकनीकी जानकारी वाले लोग भी इसका उपयोग कर सकें।

विपक्ष का हमलाः-

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस समझौते पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा कि MoU करने से पहले AI से ही ‘पूछ’ के बारे में जानकारी ले लेनी चाहिए थी।

उन्होंने कहा कि ऐसे बड़े फैसलों में पारदर्शिता और गंभीरता बेहद जरूरी है, अन्यथा “फ़ाइव परसेंटिया” जैसे भ्रष्ट और स्वार्थी तत्वों को फायदा मिल सकता है। उनके अनुसार, इस तरह के विवाद प्रदेश की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं और ईमानदार निवेशकों का भरोसा भी कमजोर कर सकते हैं।

अखिलेश यादव ने सरकार को सलाह देते हुए कहा कि प्रदेश के हितों को प्राथमिकता देते हुए ठोस और सकारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि राज्य की वास्तविक छवि बेहतर हो सके।

निवेश की बड़ी योजनाः-

यह समझौता उत्तर प्रदेश की व्यापक तकनीकी रणनीति का हिस्सा है। राज्य पहले ही 25 बिलियन डॉलर की डेटा सेंटर निवेश योजना पर काम कर रहा है। सरकार का लक्ष्य 2032 तक भारत के अनुमानित 131 बिलियन डॉलर के AI बाजार में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी हासिल करना है।

फिलहाल, इस बड़े निवेश और उस पर उठते राजनीतिक सवालों के बीच यह मुद्दा राज्य में आर्थिक संभावनाओं और राजनीतिक बहस—दोनों का केंद्र बना हुआ है।

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