बिहार का अगला CM कौन ?

बिहारः– बिहार की राजनीति एक बार फिर सत्ता और नेतृत्व के बड़े सवाल के केंद्र में आ गई है। लंबे समय तक राज्य की सियासत पर अपनी पकड़ बनाए रखने वाले नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद अब यह चर्चा तेज हो गई है कि बिहार का अगला CM कौन होगा। क्या भारतीय जनता पार्टी पहली बार राज्य में अपना मुख्यमंत्री बनाएगी या फिर सहयोगी दलों के बीच से कोई नया चेहरा सामने आएगा- इस पर राजनीतिक हलकों में लगातार मंथन जारी है।

चुनावी तस्वीर और सत्ता का गणितः-

आपको बता दे कि 2025 के विधानसभा चुनाव में 243 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 122 है। चुनाव परिणामों में सबसे बड़ी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को करीब 202 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत मिला, जबकि विपक्षी खेमे में राष्ट्रीय जनता दल के नेतृत्व वाला गठबंधन लगभग 35 सीटों पर ही सिमट गया। इस जीत के साथ भारतीय जनता पार्टी बिहार की पार्टी बनकर उभरी, जबकि जनता दल (यूनाइटेड) JDU ने भी गठबंधन के भीतर अपनी अहम मौजूदगी बनाए रखी।

हालांकि, सत्ता स्पष्ट रूप से NDA के पास होने के बावजूद मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर तस्वीर अब भी साफ नहीं है।

सम्राट चौधरी सबसे आगे?

मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे चर्चित नाम सम्राट चौधरी का है। वर्तमान में उपमुख्यमंत्री रहे चौधरी को भाजपा का मजबूत OBC चेहरा माना जाता है। कुर्मी-कोइरी समाज में उनकी पकड़ और संगठन में सक्रिय भूमिका उन्हें इस दौड़ में आगे रखती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि BJPअपना CM” बनाती है, तो सम्राट चौधरी सबसे मजबूत दावेदार हो सकते हैं।

BJP के पास अन्य विकल्प भी खुले हैं BJP के भीतर अन्य संभावित नामों पर भी चर्चा जारी है। विजय कुमार सिन्हा, जो सवर्ण वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं, और नित्यानंद राय, जिनकी संगठनात्मक पकड़ मजबूत मानी जाती है- दोनों को संभावित विकल्पों के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती जातीय संतुलन और सहयोगी दलों के हितों के बीच सामंजस्य बनाना है।

JDU की भूमिका अहम है क्योंकि जनता दल (यूनाइटेड) लंबे समय से बिहार की सत्ता का चेहरा रही है। ऐसे में नीतीश कुमार के सक्रिय भूमिका से हटने के बावजूद पार्टी नेतृत्व छोड़ने के मूड में नहीं दिखती। JDU चाहती है कि या तो मुख्यमंत्री पद उसके पास रहे या फिर सत्ता में बराबरी की भागीदारी सुनिश्चित हो। संभव है कि पार्टी किसी नए और अपेक्षाकृत “सॉफ्ट” चेहरे को आगे बढ़ाकर संतुलन बनाने की कोशिश करे।

LJP और चिराग फैक्टरः-

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान भी राजनीतिक समीकरण में अहम भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, उनके पास इतनी सीटें नहीं हैं कि वे सीधे मुख्यमंत्री बन सकें, लेकिन गठबंधन की राजनीति में वे “किंगमेकर” साबित हो सकते हैं।

 विपक्ष की स्थितिः-

वहीं आपको बता दे कि मौके पर विपक्ष में बैठे तेजस्वी यादव की अगुवाई वाली RJD भले ही 2025 में कमजोर पड़ी हो, लेकिन यादव-मुस्लिम (MY) समीकरण और ग्रामीण इलाकों में मजबूत पकड़ उसे पूरी तरह से बाहर नहीं होने देती। अगर भविष्य में गठबंधन समीकरण बदलते हैं, तो RJD फिर से केंद्र में आ सकती है।

जातीय समीकरण तय करेंगे दिशा बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री का चयन केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन का भी मामला होता है। यादव समुदाय—RJD का पारंपरिक आधार कुर्मी-कोइरी—नीतीश और सम्राट जैसे नेताओं का प्रभाव सवर्ण वर्ग- BJP का मजबूत आधार दलित और पासवान समुदाय—LJP की पकड़ इसी जातीय गणित के आधार पर मुख्यमंत्री के चेहरे का फैसला होने की संभावना है।

NDA के सामने असली चुनौतीः-

हालांकि NDA के पास स्पष्ट बहुमत है, लेकिन अंदरूनी संतुलन बनाए रखना आसान नहीं होगा। BJP जहां पहली बार अपना मुख्यमंत्री बनाने की रणनीति पर काम कर सकती है, वहीं JDU अपनी राजनीतिक भूमिका को कमजोर नहीं होने देना चाहती।

फिलहाल बिहार में सत्ता को लेकर कोई संकट नहीं है, लेकिन नेतृत्व को लेकर असमंजस अभी भी बरकरार है। क्या सम्राट चौधरी के सिर मुख्यमंत्री का ताज सजेगा, या BJP कोई नया चेहरा सामने लाएगी? या फिर JDU ही एक बार फिर सत्ता की कमान अपने हाथ में रखने में सफल होगी— इन सभी सवालों के जवाब आने वाले समय में सामने आएंगे। फिलहाल इतना तय है कि बिहार की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव के दौर में प्रवेश कर चुकी है।

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