नई दिल्लीः- PM मोदी ने देशवासियों को संबोधित करते हुए पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति को गंभीर और चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में जारी तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है और भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा।
PM ने कहा कि भारत अपनी कच्चे तेल की बड़ी जरूरतों के लिए पश्चिम एशिया पर निर्भर रहा है, खासकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य के जरिए ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण मार्ग है। वर्तमान हालात में इस मार्ग पर दबाव बढ़ने से आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है और पेट्रोल, डीजल व गैस की आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
PM मोदी ने बताया कि भारत ने ऊर्जा आयात के स्रोतों में उल्लेखनीय विविधता लाई है और अब देश 27 के बजाय 41 देशों से ऊर्जा आयात कर रहा है, जिससे आपूर्ति संकट के जोखिम को कम किया जा सके। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पश्चिम एशिया में तनाव लंबा खिंच सकता है और इसका समाधान केवल संवाद और कूटनीति से ही संभव है।
प्रधानमंत्री ने संभावित चुनौतियों के प्रति आगाह करते हुए कहा कि घरेलू LPG की उपलब्धता पर दबाव आ सकता है, इसलिए सरकार पहले से ही वैकल्पिक प्रबंधों और आपूर्ति तंत्र को मजबूत करने में जुटी है। उन्होंने कहा कि भारत को पहले भी COVID-19 जैसी बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा है और उसी तरह सामूहिक प्रयासों से इस स्थिति से भी निपटना होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक तनाव का असर महंगाई पर भी पड़ सकता है। हाल के दिनों में सब्जियों, खाद्य तेल (सरसों तेल, रिफाइंड) और मसालों की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई है, जबकि ईंधन कीमतों में संभावित उछाल का असर परिवहन और हवाई यात्रा तक पड़ सकता है।
प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपील की कि वे घबराएं नहीं, बल्कि सतर्क रहें और सरकार के साथ मिलकर इस चुनौतीपूर्ण समय का सामना करें। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं ताकि आम लोगों पर प्रभाव को न्यूनतम रखा जा सके।


