नेपालः- नेपाल की राजनीति में शनिवार सुबह एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। नए PM बालेंद्र शाह के शपथ लेने के कुछ ही घंटों बाद पूर्व PM केपी शर्मा ओली को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उनके साथ उस समय के गृह मंत्री रहे रमेश लेखक को भी हिरासत में लिया गया है। इस कार्रवाई ने न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि इसे नेपाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
मिली जानकारी के मुताबिक, पुलिस शनिवार सुबह ही सक्रिय हो गई थी। एक टीम ओली के गुंडू स्थित आवास पर पहुंची और उन्हें हिरासत में लेकर अपने साथ ले गई। वहीं, दूसरी टीम ने भक्तपुर के कुटुंजे इलाके से रमेश लेखक को गिरफ्तार किया। सूत्र बताते हैं कि यह कार्रवाई अचानक नहीं थी, बल्कि इसकी तैयारी शुक्रवार रात से ही की जा रही थी। पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क थे और कार्रवाई को गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया।
इस पूरे मामले की पुष्टि मौजूदा गृह मंत्री सुदान गुरुंग ने खुद की। उन्होंने फेसबुक पर पोस्ट करते हुए लिखा, “वादा तो वादा है… कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। यह बदले की कार्रवाई नहीं, बल्कि न्याय की शुरुआत है।” उनके इस बयान को सरकार के सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है।
दरअसल, यह गिरफ्तारी सितंबर 2025 में हुए “जेन-जी (GEN-Z) आंदोलन” से जुड़ी है। उस समय देश में भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ युवाओं ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू किया था। शुरुआत में शांतिपूर्ण रहे ये प्रदर्शन जल्द ही हिंसक हो गए। हालात इतने बिगड़ गए कि कई जगहों पर झड़पें हुईं और जान-माल का भारी नुकसान हुआ। रिपोर्ट्स के अनुसार, सिर्फ 8 सितंबर को ही 19 लोगों की मौत हो गई थी, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।
हाल ही में सार्वजनिक हुई जांच आयोग की रिपोर्ट में इस हिंसा को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए गए थे। रिपोर्ट में पूर्व PM केपी शर्मा ओली, तत्कालीन गृह मंत्री रमेश लेखक और कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर संदेह जताया गया है। जांच में यह संकेत मिला कि हालात को संभालने में गंभीर चूक हुई और कुछ फैसले विवादित रहे।
नई सरकार ने सत्ता में आते ही इस मामले को प्राथमिकता दी। PM बालेंद्र शाह ने शपथ लेने के तुरंत बाद कैबिनेट की बैठक बुलाई, जिसमें जांच आयोग की सिफारिशों को लागू करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद गृह मंत्रालय ने पुलिस को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। बताया जा रहा है कि कानून मंत्रालय भी पूरी रात इस रिपोर्ट को लागू करने की प्रक्रिया में जुटा रहा, ताकि कोई कानूनी अड़चन न आए।
आपको बता दे कि, नेपाल के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी पूर्व प्रधानमंत्री को इस तरह गंभीर आरोपों के मामले में हिरासत में लिया गया है। अब इस कार्रवाई को देश में कानून के राज, जवाबदेही और राजनीतिक पारदर्शिता की दिशा में एक बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला नेपाल की राजनीति की दिशा और दशा दोनों को प्रभावित कर सकता है।
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